Monday, July 5, 2010

तड़प

ऑंखें प्यासी हैं और प्यासी ही रहेंगी सदा,
एक झलक तुमको तकने के लिए.
अब ये कैसी सी जिंदगी रह गयी है,
तेरे बिन घुटकर भुगतने के लिए.
हर आवाज अब केवल शोर सी है,
जब तेरे शब्द नहीं सुनने के लिए.
तू तेजवान था, बहुत तेजी दिखाई तूने
मैं रह गया यूँ ही तड़पने के लिए.
मन की गहराईयों में बस एक उदासी है,
चेहरे पे हंसी है दिखाने के लिए.
वही दिन वही रात वही जीवन है, लेकिन
तुम नहीं हो यहाँ दिखने के लिए.
सारा चिंतन अब कहीं खो सा गया,
कुछ न बचा अब रचने के लिए.

1 comment:

  1. सुंदर अभिव्यक्ति ,शुभकामनायें

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