सभी हैं खास-खास आज आसपास मेरे,
एक बस तुम ही नहीं दिख रहे हो साथ मेरे,
चली है जिंदगी बनाके अपना मोहरा हमें,
बची नहीं है चाल आज कोई पास मेरे...
आ रहे बार बार होठों पे जज्बात मेरे,
नमी भरी है चहुँ ओर आसपास मेरे,
क्या कहूँ किससे कहूँ सोच रहा हूँ बैठा,
कोई हमदर्द नहीं दिख रहा है पास मेरे.
सफ़र के बीच तू अकेला हमें छोड़ गया,
राह में बिछ गए हैं आज बहुत खार मेरे,
रह रह के आ रहा है मन में ख्याल यही,
क्यों तू दिख नहीं रहा है आज पास मेरे.
तेरी याद बन गयी है जिंदगी का सबब,
तेरे ख्वाब बन गए हैं इंतज़ार मेरे,
कहूँ मैं कैसे तुमको अपने दिल की चुभन
जुबां पर आ नहीं रहे हैं अब भाव मेरे.

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