Tuesday, January 5, 2010

Happy 26th Birth Day- 6 January 2010

इस दुनिया से जाने वाले अपने साथ पीछे रह गए लोगों की ज़िन्दगी ले जाते हैं। पीछे रह गए लोगों के केवल शरीर जीवित रहते हैं, ज़िन्दगी उनके साथ नहीं होती। इस दुनिया को बीच सफ़र में अलविदा कहने वाले तो एक बार ही इस जग को अलविदा केते हैं, लेकिन पीछे रह गए लोगों को बार-बार इस दुनिया को अलविदा कहना पड़ता है। वो हँसते जरूर हैं, लेकिन उस हंसी के पीछे दर्द होता है, वो बात जरूर करते हैं लेकिन उस बातचीत के पीछे एक ख़ामोशी होती है, वो सोते जरूर हैं लेकिन उस नींद में मौत की ख्वाइश होती है, वो त्यौहार मानते जरूर हैं लेकिन वो उत्सव उदास होता है...

पीछे रह गए लोगों का जीवन क्या होता है, उसको बयां करना मुश्किल है। इस जग की यही रीत समझ से परे रही। यूँ तो मन को समझाने के लिए तमाम तर्क हैं, तमाम उदाहरण हैं, एक बार को मन समझ भी जाता है, लेकिन अगले ही पल फिर उसी दर्द में डूब जाता है। ये दुनिया बे-नूर लगने लगती है। शास्त्रों में जगत को जो मिथ्या कहकर पुकारा गया है, बस वही बात सच लगने लगती है। कुल मिलकर जिन्दगी का यही निष्कर्ष है कि इन्सान इश्वर के हाथ में एक खिलौना है। जब चाह, जिधर चाह घुमा दिया। अपनी ताकत का गुमान करने वाला इन्सान कितना कमजोर है ये वो खुद नहीं जनता। लेकिन इश्वर कहीं न कहीं, किसी न किसी मोड़ पर उसको उसकी असल पहचान जरुर कराता है। अपना तो अब यही मानना है कि ये दुनिया दिल लगाने लायक नहीं। इस मंच पर अपना किरदार अदा करो और इसे नमस्ते करो। ज्यादा दिल लगाओगे तो पछताना पड़ सकता है।

प्रिय रौमी, तुमको जन्मदिन की बधाई। न जाने तुम कहाँ हो कैसे हो, लेकिन एक दर्द के साथ तुम हमारे दिलों में तो सदा ही जीवित हो। अब ये तो मुमकिन नहीं कि तुमको जन्मदिन का कोई उपहार दिया जाये, लेकिन हम तुम्हारे लिए मंगल कामना करते हैं और ये उम्मीद भी करते हैं कि तुम अपने उसी अंदाज में इस जग को फिर से रोशन करोगे। जिन्दगी की एक नयी शुरुआत करना, तुमको ऐसा सुन्दर संसार मिले जहाँ तुम अपनी ख्वाहिशों के साथ उड़ान भर सको, जहाँ तुम अपनी जिन्दगी को भरपूर जी सको....

1 comment: