
जीवन में कुछ कलियाँ खिली ही थीं, लंबे अन्तराल के बाद होठों पर मुस्कराहट ने दस्तक दी थी, परिवार में थोड़ा सा संतोष का भाव आया था, इस बात की सूचना किसी ने ईश्वर को दे दी और उसने काल को भेजकर राहुल तुमको हमसे छीन लिया। परिवार का सबसे होनहार हीरा भगवान को पसंद आया। कोई कारण भी न था। आधा घंटे के अन्दर सब खत्म हो गया, बिना हमे ये मौका दिए की हम तुम्हारे लिए कुछ कर सकें। किसी ने सोचा भी न था की इतनी छोटी सी उम्र में तुम्हारा शक्तिशाली शरीर हार्ट अटैक का शिकार हो जाएगा। हम तड़पते रहे तुमसे मिलने के लिए, पर भगवान ने इतना भी मौका न दिया की हम तुमसे बात भी कर पाते। तुम्हें बंगलोर से मुरादाबाद तक लाने में ही पापा बूढे हो गए। तुमने अपने छोटे से जीवन में केवल परोपकार किया। अपने बारे में कभी सोचा ही नहीं। अगर सोचते तो शायद ऐसा नहीं होता। खैर अब तो हम सबकी आँखों में बस आंसू हैं और तुम्हारी यादें हैं। मम्मी-पापा अब सचमुच बूढे हो गए हैं, परिवार का एक-एक सदस्य टूट चुका है। सब यही जानना चाहते हैं कि क्या भलाई का यही नतीजा होता है।
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