
तुम ऐसा दिन दिखाओगे, ये कभी सोचा न था,
बीच सफर में हमको छोड़ जाओगे, सोचा न था,
इतनी सारी खुशियाँ देकर, आँखों को नए सपने देकर,
तुम ख़ुद मुरझा जाओगे, सोचा न था,
नन्हीं नन्हीं खुशियों ने अभी घर में कदम रखे ही थे,
इन खुशियों के बीच तुम ऐसा पहाड़ तोड़ जाओगे, सोचा न था,
तुम्हारे बिना खुशियों की कल्पना ही व्यर्थ है,
तुम ऐसे सबको तडपाओगे सोचा न था,
दिन तुम्हारी याद में और रात रोते कटती है,
तुम इतना हमें रुलाओगे, सोचा न था...